राजधानी लखनऊ में एआरटीओ यातायात व थाना पुलिस के गठजोड़ व धन उगाही से वाहन स्वामियों में आक्रोश
एआरटीओ यातायात और थाना पुलिस वसूली में मस्त
*राजधानी लखनऊ में वाहन स्वामियों से जबरन वसूली का गठजोड़*
*एआरटीओ, ट्रैफिक और थाना पुलिस की साठगाँठ से धन उगाही चरम पर*
*वाहन मालिक त्रस्त-पुलिस मस्त*
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों एआरटीओ (Assistant Regional Transport Officer), यातायात पुलिस और स्थानीय थाना पुलिस के बीच एक अघोषित ‘गठजोड़’ फल-फूल रहा है, जिसके चलते बड़े वाहन मालिकों की परेशानी चरम सीमा पर पहुँच गई है। यह गठजोड़ अवैध धन उगाही को इस कदर बढ़ावा दे रहा है कि कई वाहन मालिकों को एक ही दिन में तीन-तीन बार अवैध वसूली या चालान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है।
*फैजाबाद रोड (मटियारी, चिनहट) बना वसूली का हॉटस्पॉट*
शिकायतों के अनुसार, अवैध धन उगाही का यह खेल फैजाबाद रोड पर स्थित मटियारी और चिनहट क्षेत्रों में विशेष रूप से संगठित तरीके से चल रहा है।
* संयुक्त चेक पोस्ट: सूत्रों के मुताबिक, इन ‘वसूली चौकियों’ पर एआरटीओ, यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिसकर्मी संयुक्त रूप से तैनात रहते हैं। इन चौकियों पर नियमों की आड़ में बड़े वाहनों (ट्रक, बसें, लोडर) को रोककर नियमों का हवाला देकर जबरन पैसे की माँग की जाती है।
* दैनिक ‘टारगेट’ की शिकायत: बस ट्रक यूनियन के सदस्यों का आरोप है कि इन अधिकारियों को कथित रूप से दैनिक या साप्ताहिक ‘टारगेट’ दिए जाते हैं। जो वाहन ‘हफ़्ता’ नहीं देते, उन्हें बार-बार रोका जाता है और मामूली कमियों पर भी भारी-भरकम चालान किए जाते हैं।
* एक दिन में तीन चालान: कई वाहन स्वामियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें एक ही दिन के भीतर परिवहन नियमों से संबंधित अलग-अलग बहाने बनाकर तीन विभिन्न स्थानों पर रोका गया और वसूली न देने पर चालान काट दिया गया। इस प्रकार की ‘पीनल हैरेसमेंट’ (दंडात्मक उत्पीड़न) की कार्रवाई से वे पूरी तरह से हताश हैं।
*वाहन स्वामियों में गहरा आक्रोश*
इस भ्रष्टाचार के कारण केवल वाहन मालिक ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि वसूली का भार अंततः परिवहन लागत पर पड़ता है। वाहन स्वामियों का कहना है कि वे सभी आवश्यक कागजात और परमिट लेकर चलते हैं, लेकिन एआरटीओ और पुलिसकर्मी छोटी-छोटी या तकनीकी कमियों को बढ़ाकर पेश करते हैं, जिनका उद्देश्य केवल जेब भरना होता है।एक ट्रक मालिक (पहचान गोपनीय) ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “हमारा सारा लाभ तो इन चौकियों पर ही चला जाता है। यदि यह भ्रष्टाचार बंद नहीं हुआ, तो हम लखनऊ में माल की ढुलाई बंद करने पर मजबूर हो जाएँगे, कमोवेश यही हाल लखनऊ के प्राइवेट बस मालिकों का भी है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और अधिकारी मस्त हैं।
*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
राजधानी में इतने बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार पर उच्च प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इस गठजोड़ को तोड़ने और आम जनता तथा व्यवसायियों को राहत देने के लिए एक उच्च-स्तरीय जाँच और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
बस ट्रक ओनर्स एसोसिएशन ने जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय और परिवहन मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग करने का निर्णय लिया है।
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