E-Paperhttps://navbharatdarpan.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedक्राइमखेलछत्तीसगढ़टेक्नोलॉजीटॉप न्यूज़दिल्ली NCRदुनियादेशधर्मपंजाबबिहारबॉलीवुडमध्य प्रदेशमहाराष्ट्रयुवायूपीराजनीतिराजस्थानराज्यलोकल न्यूज़
Trending

नीट काउंसलिंग में धांधली बना लखनऊ में चर्चा का विषय

राजधानी लखनऊ में नीट काउंसलिंग में दलाली चर्चा बना चिंता का विषय

*नीट काउंसलिंग पर बड़ा सवाल, लखनऊ में उठे ‘धांधली’ के आरोप*

*20 अंक वाले भी MBBS में!*

लखनऊ। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) की काउंसलिंग प्रक्रिया पर लखनऊ में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हज़रतगंज चौराहे पर हुई एक बहुचर्चित सार्वजनिक बहस से सामने आई जानकारी के अनुसार, योग्यता और नियमों को ताक पर रखकर, बेहद कम अंक प्राप्त करने वाले और यहां तक कि परीक्षा क्वालिफाई न कर पाए अभ्यर्थियों को भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला दिया जा रहा है।

*योग्यता दरकिनार, दलाल सक्रिय*

चर्चा के दौरान यह चौंकाने वाला दावा किया गया कि जिन छात्रों के अंक 160 से भी कम हैं, और कुछ मामलों में तो मात्र 15 से 20 अंक हैं, वे भी काउंसलिंग या सीधे प्रवेश के रास्ते मेडिकल सीट हासिल करने के प्रयास में हैं। यह सीधा उल्लंघन है, क्योंकि नियमानुसार केवल क्वालिफाईड छात्रों को ही दाखिले का पात्र माना जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अनियमितता एक सुनियोजित दलाल तंत्र के माध्यम से चल रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के दलाल सबसे ज़्यादा सक्रिय हैं।

*विशेष कोटा और सरकारी फीस पर प्रवेश?*

आरोप है कि यह धांधली सिर्फ प्राइवेट सीटों तक सीमित नहीं है। कुछ मामलों में, गैर-योग्य अभ्यर्थियों को विशेष कोटा के तहत सरकारी फीस पर ही एडमिशन दिलाने में भी सफलता मिल रही है। यह स्थिति योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है।
इन अनियमितताओं के केंद्र में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य बताए जा रहे हैं।

*20 नंबर वाले छात्र का उदाहरण*

बहस के दौरान एक विशिष्ट मामले का हवाला दिया गया: एक छात्र जिसका NEET स्कोर मात्र 20 है, वह भी कथित तौर पर उत्तराखंड के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया में शामिल है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के डॉक्टरों की काबिलियत पर एक गंभीर खतरा है।

*रासुका के तहत कार्रवाई की मांग*

सार्वजनिक चर्चा में शामिल लोगों ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस पूरे मामले की तत्काल और उच्च-स्तरीय जाँच की मांग की है। उनकी मांग है कि न केवल ऐसे सभी एडमिशन निरस्त किए जाएं, बल्कि इसमें शामिल छात्र, दलाल, और मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) यानी रासुका के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि देश की चिकित्सा व्यवस्था की पवित्रता बनी रहे।

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!