नीट काउंसलिंग में धांधली बना लखनऊ में चर्चा का विषय
राजधानी लखनऊ में नीट काउंसलिंग में दलाली चर्चा बना चिंता का विषय
*नीट काउंसलिंग पर बड़ा सवाल, लखनऊ में उठे ‘धांधली’ के आरोप*
*20 अंक वाले भी MBBS में!*
लखनऊ। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) की काउंसलिंग प्रक्रिया पर लखनऊ में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हज़रतगंज चौराहे पर हुई एक बहुचर्चित सार्वजनिक बहस से सामने आई जानकारी के अनुसार, योग्यता और नियमों को ताक पर रखकर, बेहद कम अंक प्राप्त करने वाले और यहां तक कि परीक्षा क्वालिफाई न कर पाए अभ्यर्थियों को भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला दिया जा रहा है।
*योग्यता दरकिनार, दलाल सक्रिय*
चर्चा के दौरान यह चौंकाने वाला दावा किया गया कि जिन छात्रों के अंक 160 से भी कम हैं, और कुछ मामलों में तो मात्र 15 से 20 अंक हैं, वे भी काउंसलिंग या सीधे प्रवेश के रास्ते मेडिकल सीट हासिल करने के प्रयास में हैं। यह सीधा उल्लंघन है, क्योंकि नियमानुसार केवल क्वालिफाईड छात्रों को ही दाखिले का पात्र माना जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अनियमितता एक सुनियोजित दलाल तंत्र के माध्यम से चल रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के दलाल सबसे ज़्यादा सक्रिय हैं।
*विशेष कोटा और सरकारी फीस पर प्रवेश?*
आरोप है कि यह धांधली सिर्फ प्राइवेट सीटों तक सीमित नहीं है। कुछ मामलों में, गैर-योग्य अभ्यर्थियों को विशेष कोटा के तहत सरकारी फीस पर ही एडमिशन दिलाने में भी सफलता मिल रही है। यह स्थिति योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है।
इन अनियमितताओं के केंद्र में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य बताए जा रहे हैं।
*20 नंबर वाले छात्र का उदाहरण*
बहस के दौरान एक विशिष्ट मामले का हवाला दिया गया: एक छात्र जिसका NEET स्कोर मात्र 20 है, वह भी कथित तौर पर उत्तराखंड के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया में शामिल है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के डॉक्टरों की काबिलियत पर एक गंभीर खतरा है।
*रासुका के तहत कार्रवाई की मांग*
सार्वजनिक चर्चा में शामिल लोगों ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस पूरे मामले की तत्काल और उच्च-स्तरीय जाँच की मांग की है। उनकी मांग है कि न केवल ऐसे सभी एडमिशन निरस्त किए जाएं, बल्कि इसमें शामिल छात्र, दलाल, और मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) यानी रासुका के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि देश की चिकित्सा व्यवस्था की पवित्रता बनी रहे।

