डग्गामारी के नाम पर वाहन स्वामियों का उत्पीड़न, जिम्मेदार मौन
वाहन स्वामियों में आक्रोश, उत्पीड़न बंद करने की मांग
लखनऊ ट्रैफिक में भारी अव्यवस्था — डग्गामार वाहनों पर रोक से मरीज, मजदूर और यात्री बेहाल, अधिकारी मौन
मो० शोएब
लखनऊ – राजधानी के यातायात क्षेत्र में डग्गामार वाहनों पर लगे लॉकडाउन और प्राइवेट बसों के शहर में प्रवेश प्रतिबंध का गहरा असर सामने आ रहा है। दूर-दराज़ से आने वाले यात्री भारी परेशानी झेल रहे हैं। शहर की सीमाओं पर यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन एसीपी ट्रैफिक, टीआई और टीएसआई सहित जिम्मेदार अधिकारी सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराने में असमर्थ नज़र आ रहे हैं।
परिवहन विभाग भी यात्रियों के लिए न कोई वैकल्पिक व्यवस्था दे पा रहा है, न ही स्पष्ट दिशानिर्देश। जानकारी के अभाव में यात्री शहर के बाहर ही फँसे रह जा रहे हैं। कई बसें इंदिरा नहर, बाहरी रिंग रोड और मर्सिडीज़ कटिंग पर रोक दी जा रही हैं, जिससे मरीजों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं।
लखनऊ जैसे बड़े शहर में, जहाँ लोहिया, केजीएमयू और बलरामपुर जैसे प्रमुख अस्पताल मौजूद हैं, इलाज कराने आने वाले मरीजों को शहर की सीमा से आगे नहीं जाने दिया जा रहा। मजबूर होकर उन्हें महँगे किराए पर प्राइवेट ऑटो या टेंपो लेना पड़ रहा है। कई यात्रियों ने बताया कि मनमानी वसूली अब सामान्य बात बन चुकी है, और अधिकारी इस पर भी मौन हैं।
वहीं प्राइवेट वाहन स्वामियों में भी नाराज़गी बढ़ रही है। उनका कहना है कि सरकार को टैक्स और फीस जमा करने के बावजूद शहर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। बस मालिकों ने 40–50 लाख रुपये लगाकर वाहन चलाए हैं, लेकिन बसें खड़ी रह जाने से उनकी मासिक किस्तें और रोज़गार दोनों खतरे में हैं।
यात्रियों का यह भी कहना है कि पहले प्राइवेट बसें सीधे चारबाग, डालीगंज, मेडिकल कॉलेज, लोहिया तक जाती थीं, जिससे सुविधा रहती थी, लेकिन अब व्यवस्था सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित दिखाई देती है। ज़मीनी स्तर पर यात्री बेबसी और अव्यवस्था झेल रहे हैं।
ऊपर से उच्च अधिकारियों द्वारा आदेश पारित कर मौके से नदारद रहने की स्थिति ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। यात्री साफ कह रहे हैं कि जब जनता सड़क पर परेशान है, तब अधिकारी सिर्फ जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने में लगे हैं।
अगर डग्गामार वाहनों या प्राइवेट बसों के लिए कोई डाइवर्जन या प्रतिबंध लागू किया गया है, तो उसका आधिकारिक आदेश सार्वजनिक किया जाए, ताकि यात्रियों को भ्रम और परेशानी न हो।
यात्री और बस मालिक प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि मरीजों, मजदूरों और दूर से आने वाले लोगों को राहत मिल सके और लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था में वास्तविक सुधार हो।

