पं०नीरज शर्मा के छठ गीत ने श्रोताओं व दर्शकों को किया मुग्ध
लाखों लोगों ने छठ गीत को सराहा
लखनऊ,लोक संगीत की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाले अवधी और भोजपुरी गायक कलाकार पंडित नीरज शर्मा ने छठ महापर्व के अवसर पर एक नया भक्तिमय गीत “गंगा किनारे करब छठ के पूजनवा”प्रस्तुत किया है, जिसने रिलीज होते ही श्रोताओं और दर्शकों के दिलों को छू लिया है। यह गीत छठ पूजा की आस्था और पारंपरिक महत्व को दर्शाता है, जिसके चलते इसे अपार लोकप्रियता मिल रही है और यह भक्ति संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
गीत के विमोचन के साथ ही पंडित नीरज शर्मा ने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी से एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोक पर्वों के प्रति उनकी श्रद्धा कितनी गहरी है। “गंगा किनारे करब छठ के पूजनवा” गीत में छठ मईया के प्रति अटूट विश्वास और व्रत के कठोर नियमों का सुंदर वर्णन किया गया है। गीत के बोल अत्यंत सरल और मर्मस्पर्शी हैं, जो सीधे श्रोताओं को आस्था के केंद्र से जोड़ते हैं।
*श्रोताओं ने बरसाया प्यार*
पंडित नीरज शर्मा सुर संगीत के बैनर तले प्रस्तुत इस गीत को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। लाखों की संख्या में दर्शक इसे न केवल सुन रहे हैं, बल्कि साझा भी कर रहे हैं। छठ महापर्व के अवसर पर जारी यह गीत इस साल के छठ पूजा के गीतों की सूची में प्रमुख स्थान बना चुका है। दर्शकों ने विशेष रूप से गीत के संगीत, नीरज शर्मा की भावुक प्रस्तुति और पारंपरिक छठ पर्व की झलक दिखाने वाले वीडियो की सराहना की है।
एक श्रोता ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पंडित जी की आवाज में एक अलग ही मिठास है। यह गीत सुनकर मन को बहुत शांति मिली और छठ पूजा की भावना जागृत हुई।” वहीं एक अन्य दर्शक ने टिप्पणी की, “अवधी और भोजपुरी लोकगीतों के पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए नीरज शर्मा जी ने छठ मईया के प्रति सच्ची भक्ति व्यक्त की है। यह गीत हर छठ व्रती के लिए प्रेरणादायक है।
*लोक संस्कृति को बढ़ावा*
पंडित नीरज शर्मा अवधी और भोजपुरी संस्कृति के संवाहक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने हमेशा अपनी कला के माध्यम से इन क्षेत्रों के लोकगीतों और परंपराओं को सहेजने का काम किया है। उनका नया छठ गीत इस बात का प्रमाण है कि वे अपनी संस्कृति को आधुनिक मंचों पर भी जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस गीत ने न केवल मनोरंजन किया है, बल्कि छठ महापर्व की महत्ता को भी जन-जन तक पहुंचाया है।
पंडित नीरज शर्मा ने सभी श्रोताओं और दर्शकों का आभार व्यक्त किया है और कहा है कि यह प्यार ही उन्हें लोकगीतों और भक्ति संगीत के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। उनका यह गीत छठ महापर्व के उल्लास को बढ़ाने और भक्ति की एक नई लहर लाने में सफल रहा है।
